20 May 2009

आम है खास

फलों के राजा आम में क्या है खास, जानते हैं।
रसीले आम... वाह! मजा आ गया खाकर। इसकी खुशबू इतनी लाजवाब है कि आम के बगीचे में आप कभी जाएंगे, तो बिना आम तोड़े नहीं रह सकेंगे। जिस तरह पश्चिमी देशों में सेब और अरब जगत में अंगूरों के लिए दीवानगी है, उसी तरह हमारे देश में लोग आम के स्वाद के दीवाने हैं। वेदों में आम को विलास का प्रतीक माना गया है। महाकवि कालिदास ने इसका गुणगान किया, तो सिकंदर को भी आम बेहद खास लगे। सम्राट अकबर ने तो दरभंगा में आम के एक लाख पौधे लगवा दिए थे और वह बाग आज भी 'लाखी' बाग के नाम से मशहूर है।

आम के कई रूप हैं। आम का बौर, कैरी या कच्ची अंबिया और पका आम। आम की लोकप्रियता हमारे देश में इतनी है कि इस पर लोकगीत तक लिखे जा चुके हैं। आम से बना पना, अचार, मुरब्बा या जैम तो आपने जरूर खाया होगा। कैसा लगा? यकीनन स्वादिष्ट। और हां, अमचूर यानी आम की खटाई के बिना तो मानो हर स्वाद अधूरा है। तमिलनाडु के कृष्णगिरी के आम तो दुनियाभर में मशहूर हैं।
फलों के इस राजा को भारत का राष्ट्रीय फल यूं ही नहीं कहा जाता। इसके गूदे में जो रेशा होता है, वह न केवल हाजमा सही करता है बल्कि कॉलेस्ट्रोल भी घटाता है। इसमें विटामिन सी प्रचुर मात्रा में होता है। सबसे अच्छा आम वही होता है, जिसमें रेशा कम, गूदा ज्यादा और मीठा हो। आम के पेड़ को हमारे यहां खुशियों से जोड़कर देखते हैं। आज आम के लिए कलम बांधने की कला में मलीहाबाद के हाजी कलीम उल्ला खान वाकई कमाल कर रहे हैं। सत्तर वर्ष के हाजी साहब को इस हुनर के लिए इस साल पद्मश्री से सम्मानित किया गया है। वे कलम लगाकर आम के एक ही पेड़ में 300 किस्मों के आम पैदा कर चुके हैं। पचास-पचपन साल पहले चंडीगढ़ के बुड़ैल गांव में आम का एक विशाल पेड़ था। उसकी उम्र 100 वर्ष से भी अधिक थी। उसका तना 9.75 मीटर मोटा था और पेड़ 2,258 मीटर क्षेत्र में फैला हुआ था। एक साल में उससे करीब सोलह-सत्रह टन फल मिलते थे।
आम की किस्में
दुनिया के तीन चौथाई से ज्यादा आम एशिया में पैदा होते हैं। उसमें भी सबसे ज्यादा आम हमारे देश में ही पैदा होते हैं। हमारे देश की कुछ खास किस्में हैं- दशहरी, लंगड़ा, चौसा, बैंगनपल्ली, हिमसागर, फजली, खासा, प्रिंस, आबेहयात, अलफांजो, केसर, किशनभोग, मलगोवा, नीलम, वनराज, जरदालू, मल्लिका, रत्ना, अर्का अरुण, अर्मा पुनीत, अर्का अनमोल, बंबई ग्रीन, शम्सुल अस्मर, हलवा, लखनऊ सफेदा। इन नामों के किस्से भी बहुत दिलचस्प हैं। 'लंगड़ा' आम सुनकर सोच रहे होंगे, भला ये भी कोई नाम हुआ। पर इस किस्म के आम का पहला पेड़ बनारस में एक लंगड़े फकीर बाबा के घर के पिछवाड़े उगा था। और स्वादिष्ट दशहरी के बारे में कहा जाता है कि यह लखनऊ के पास मलीहाबाद के दशहरी गांव में पैदा हुआ। मलीहाबाद तहसील के ही चैसा गांव में लोगों ने जब पहली बार एक अलग स्वाद और सुगंध वाला आम चखा तो उसका नाम 'समरबहिश्त चैसा' रख दिया! इसी तरह बिहार के भागलपुर गांव में एक औरत थी-फजली। पहली बार उसी के आंगन में फला-फूला था यह आम।
गुणों की बहार
यदि गर्भस्थ महिला आम चूसती है, तो इससे शिशु का रंग साफ होता है।
जो महिलाएं चेहरे का सौंदर्य बढ़ाना चाहती हैं, वे आम के रस में शहद मिलाकर चेहरे पर लगाएं।
आंखों के चारों ओर काले घेरे हों, तो आम के रस में रुई डुबोकर चेहरे पर लगाएं।
बाल झड़ते हैं, तो आम के पत्तों और डंठल को पानी में उबालकर हफ्ते में दो बार सिर धोएं।
कान का दर्द होने पर आम का पत्ता पीसकर (बिना पानी) हल्का गर्म करके कान में डालें।
-आशीष जैन

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2 comments:

  1. अच्छी जानकारी

    अभार

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  2. अच्छी जानकारी

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